जून का महीना
मेरे नगपति! मेरे विशाल!
साकार, दिव्य, गौरव विराट्, पौरुष के पुंजीभूत ज्वाल!
मेरी जननी के हिम-किरीट! मेरे भारत के दिव्य भाल!
मेरे नगपति! मेरे विशाल! युग-युग अजेय, निर्बंध, मुक्त,
युग-युग गर्वोन्नत, नित महान्, निस्सीम व्योम में तान रहा
युग से किस महिमा का वितान? कैसी अखंड यह चिर-समाधि?
यतिवर! कैसा यह अमर ध्यान?